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सतत अनवरत अन्वेषण से,अकस्मिक भी मिल जाता है

सब अपने-अपने गाँव चले

मरीचिका

माँ का किचन

दिखा दो ज़ोर

अंत न हो इस दौङ का

विद्या ददाति विनयं ?

लौटी न ललकार गुरुत्वाकर्षण कम है

महाविकट औंघाई

लो झंडु बाम हुए,बाबरी* तेरे लिये..

आरज़ू अनंत,मन घुमंत

मुश्किल,हुई मुश्किल,हुई मुश्किल

हीलियम के हम ग़ुब्बारे

"मत-लब" की कुछ बात